Wednesday, March 11, 2015

वजूद उनका

सर्द दोपहर,कुहासे में लिपटे सूरज से छन कर आती धूप,
तन को अपने सेंकते देखा जो उनको हमने ,
हाथों की सलवटों और चेहरे की झुर्रियां ,
अहसास उम्र का दिलाने लग गयीं हैं ,
निगाहों में बस अब एक चमक सी ही रह गयी है ,
वरना  सांसें तो अंत की दहलीज पर जा खड़ी हैं ,
एक झटका सा मन को यूँ लगा ?
उनकी यादें क्या उनके साथ ही जाएँगी ,
ऐसा होने न देगा मन मेरा ये कह उठा,
सोचा की जीवन था उनका पर पाया हमने भी बहुत है ,
उनके जीवन की हर साँस से हमने भी सीखा बहुत है ,
क्या करूँ कुछ ऐसा की उनके होने का,
अहसास जीवन भर रह जाये साथ हमारे ,
 सोच मन में थी ,समेटने की चाह दिल में है ,
उनके जीवन की हर याद अपना बना लूँ ,
इस अहसास के संग हर खट्टी-मीठी याद को पन्नों में बसा लूँ
उनके वजूद के मिटने से पहले उन्हें दिल के कोनों में बिठा लूँ ,
हर याद उनकी अपने संग कुछ इस तरह से संजों लूँ ,


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